रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है पुराणों के अनुसार

हमारा देश भारत त्योहारों और खुशियों की वो स्थली है जहाँ पर दुनिया के सबसे ज़्यादा पर्व और त्यौहार मनाये जाते हैं। यह ऐसी भूमि है जहाँ पर हर एक त्यौहार बड़े ही उत्साह और हर्षोउल्लास एवं खुशियों के साथ मनाया जाता है. बैसे तो भारत एक विभिन्न संस्कृतियों का संगम है लेकिन यहां प्रत्येक मौसम के साथ साथ अनेक त्यौहार एक के बाद एक आते ही रहते हैं और मनाये ही जाते हैं। और जिनका मनाने का एक अपना अलग ही मज़ा होता है। 

प्रत्येक त्यौहार की अपनी अपनी रीती रिवाज हैं मान्यताएं हैं जिन्हें लोग बहुत ही खुशी के साथ पूरा भी करते हैं। भारत में त्यौहार सिर्फ त्यौहार नहीं हैं वो एक खुशियों का,आनंद , हर्षोल्लास तथा कभी कभी मस्ती का भी पिटारा है जिसके आने पर सब ख़ुशी से भर जाते हैं। चेहरे चमकने लगते हैं एवं गॉंव गॉव ,नगर नगर सभी दमकने लगते हैं। 

तो ऐसे ही खुशियों से भरा सबसे पवित्र त्यौहार है जो साल के सावन के महीने की पूर्णिमां को मनाया जाता है जिसका नाम है “रक्षाबंधन” जो बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है। 
 
रक्षाबंधन त्यौहार भारत के बड़े त्योहारों  में से एक है जो भाई -बहिन के पवित्र प्रेम और कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है। 
 
यह वो दिन होता है जिस दिन हर बहन अपने भाई की कलाई में रक्षा का सूत्र बाँधती है जो पवित्रता, शुद्धता और अटूट बंधन का प्रतीक होता है। रक्षाबंधन प्रमुख रूप से  हिन्दुओं का पर्व है। यह परंपरा हमारे भारत में सदियों से प्रचलित है और इसे श्रावण पूर्णिमा का बहुत बड़ा त्यौहार माना जाता है। 
 
 हम सालों से इस त्यौहार को अनादपूर्ण मनाते आ रहे हैं लेकिन क्या आपको इस त्यौहार से जुड़े सभी चीजों के बारे में जानकारी है? जैसे- रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है? रक्षा बंधन की उत्पत्ति कैसे और कहाँ से हुई? रक्षा बंधन कब मनाया जाता है?तो दोस्तों इन सभी सवालो के जवाब मैं इस लेख रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है पुराणों के अनुसार  के माध्यम से बताने जा रहा हूँ :
 

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है पुराणों के अनुसार?

रक्षा बंधन जिसे राखी भी कहा जाता है। यह  त्यौहार सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है।  इस रक्षा बंधन पर विशेष रूप से बहने अपने भाई के कलाई में राखी बाँधती है और उनके लिए लम्बी आयु की कामना भी करती है। 
 
और भाई भी अपनी बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन बहिन को देता है। ऐसा मान्यता है कि राखी के रंगबिरंगे धागे से भाई बहन के पवित्र प्यार के बंधन को और भी मजबूत करते हैं कभी न टूटने वाले बंधन में।  यह वो पवित्र त्योहार है  जो  भाई बहन के पवित्र रिश्ते को पूरा आदर और सम्मान देता है। 
 
बैसे तो यह त्यौहार मुख्य रूप से हिन्दुओं का त्यौहार है परन्तु इसे भारत में सभी धर्म के लोग उसी उत्साह के साथ मनाते हैं। रक्षाबंधन इसलिए भी खास है क्योकि यह पारवारिक मेल मिलाप भी बढ़ाता है साथ ही भाई बहिन के रिश्ते को और भी गहरा बनाता है।  
 
इस पावन पर्व पर परिवार के सभी सदस्य साथ इक्कठे होते हैं,मिठाई ,पकवान आदि बनाये जाते हैं । विवाहित बहने ससुराल से मायका अपने भाई को राखी बाँधने आती है। 
 
भाई भी अपनी बहिन से राखी बंधवाने के लिए दूर दराज देश से अपने घर आते हैं जिसमें देश के सैनिक सबसे अधिक खास  होते हैं, जो दिन रात देश की रक्षा करने में लगे रहते हैं। इस तरह घर की रौनक बढ़ जाती है और जो लोग सालों से एक दुसरे से दूर रहते हैं उन्हें भी एक दुसरे के करीब आने का मौका मिल जाता है। 
 
इस तरह रक्षाबंधन के दिन परिवार सभी सदस्य एक हो जाते हैं और राखी, उपहार और मिठाई देकर अपना प्यार शेयर करते हैं। 

रक्षाबंधन की रूपरेखा – रक्षाबंधन पर बिशेष निबंध

यह त्यौहार केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उसी उत्साह के साथ मनाया जाता है जैसे नेपाल और मौरीसिअस। दुसरे बड़े बड़े देशों में जहाँ भारतीय लोग रहते हैं वहां पर भी रक्षाबंधन का पर्व  खूब जोर शोर से मनाया जाता है जैसे – UAE ,USA ,UK ,CANADA ,ऑस्ट्रेलिया। 
 
भारत में रक्षा बंधन के त्यौहार को अलग  अलग राज्यों में अन्य नामो से भी जाना जाता है।  जैसे की उत्तरीय दिशा और पश्चिमी भारत में रक्षा बंधन के त्यौहार को लोग “राखी पूर्णिमा” के रूप में मनाते हैं। 
 
और इसी दिन दक्षिणीय भारत में इस पर्व को “अवनी अवित्तम” या “उपकर्मम” के नाम से मनाया जाता है। जबकि पश्चिमी घाट के क्षेत्र में राखी के पर्व को “नारियल पूर्णिमा” कहा जाता है। 
 
अब सवाल यह आता है कि रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है इसके पीछे क्या कहानी है पुराणों  के अनुसार? रक्षाबंधन एक सामाजिक, पौराणिक, धार्मिक और एतिहासिक वजहों से केवल भारत में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में सदा से प्रचलित है। पुराणों के अनुसार रक्षाबंधन त्योहार मनाने के पीछे बहुत सी पौराणिक कथाएँ हैं जो इस रक्षाबंधन त्यौहार का इतिहास बताती  हैं।  
 

पुराणों के अनुसार रक्षाबंधन की कहानी

कुछ पुराणों के अनुसार एक प्रचलित कहानी कि रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है इस प्रकार से है :

एक समय की बात है पृथ्वी पर दैत्यों का एक राजा था जिसका नाम था बलि जो बहुत ही बलवान और धर्मपरायण था। साथ ही भगवन विष्णु का भक्त भी था। शुरवीर होने के साथ बड़ा दानी भी था। वह कभी भी अपने द्वार से किसी भी मांगने वाले को खाली हाँथ नहीं जाने देता था। 
 
राजा बलि की दानवीरता तीनों लोकों में व्याप्त थी। एक समय जब दैत्यों का राजा  बलि अश्वमेघ यज्ञ कर रहा था। तो देवताओ के राजा इंद्र को अपने राज्य और लोक जाने  का भी सताने लगा और साथ ही चिंतित भी रहने लगा की कैसे इस दैत्य को रोका जाए क्योकि वह भगवन विष्णु का उपासक भी था। 
 
इंद्र का और बलि का घोर युद्ध हुआ जिसमें इंद्र की हार हुई और बलि स्वर्ग का राजा बन गया। तब इंद्र ने अपनी माता अदिति से  प्रार्थना की कि मेरी और मेरे शासन की रक्षा करो। 
 
तब माता अदिति ने भगवन विष्णु से प्रार्थना की मेरे पुत्र होकर आप इस दैत्य से मेरे पुत्र इंद्र और उसके साम्राज्य की रक्षा करें। तब प्रभु नारायण ने बहुत ही अच्छा कह वामन रूप से अवतार लिया। 
भगवन वामन अर्थात विष्णु जी साधु से भेष में राजा बलि के द्वार पर पहुंचे। राजा बलि उस समय पूजा करके ही निवृत हुआ था। तभी द्वार पर साधु बालक की बात सुनकर राजा द्वार पर पहुंचा। बलि ने देखा कि द्वार पर एक अद्भुत सौंदर्य का स्वामी एक साधु बालक खड़ा हुआ है जिससे देखकर राजा बलि मंत्रमुग्ध सा खड़ा साधु को देखता ही रह गया। 
 
उसके मन में विचार आया कि भला कोई इतना भी सूंदर हो सकता है। यह तो मुझे अपने स्वामी हरि ही नजर आते हैं जैसे वो ही मेरी प्रार्थना स्वीकार कर मेरे द्वार पधारे हों। 
 
राजा ने यही सोचते हुए कि यह मेरे प्रभु ही आये हैं उनकी पूजा अर्चना स्तुति की उसके पश्चात उन्हें आसान दिया। राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य यह बात जान गए कि भगवन हरि ही हैं। उन्होंने राजा को इस साधु बालक को कुछ भी न देने की सलाह दी। 
  
परन्तु राजा ने कहा कि यदि यह स्वयं भगवान हैं तो यह मेरे लिए परम् सौभाग्य की बात है। दूसरी बात यह कि में तीनो लोकों में प्रसिद्ध दानी हूँ और मेरी यह सदा से प्रतिज्ञा है कि कोई भी मेरे द्वार से खाली नहीं जाएगा। फिर वह दुश्मन ही क्यों न हो ?
 
राजा बलि ने साधु से कहा कि प्रभु आप दान दक्षिणा में क्या लेंगे ?तो साधु बालक वामन जी ने कहा  कि मुझे सिर्फ अपने तीन पग धरती  चाहिए। इस पर राजा बलि हंसे और बोले ” हे साधु ! आप तो निरा बालक ही हैं ,भला तीन पग आपके लिए कितनी सम्पति या जमीन होगी”। परन्तु साधु बालक ने कहा मुझे सिर्फ इतना ही चाहिए। राजा बलि ने कहा मेरी सब सम्पत्ति आपकी ही है आप जो चाहे मांग सकते हैं भला इतने में क्या होगा। 
 
लेकिन जब साधु बालक नहीं माने तो राजा ने मन में सोचा बालक हट है एक बार जो मन को ठीक लगे वही करते हैं। उसके बाद राजा तीन पग धरती देने जो तैयार हुआ तो समय भी उसके गुरु ने रोका कि बलि अब भी वक्त है घमंड में मत डुबो। 
 
लेकिन बलि ने बात नहीं सुनी और संकल्प कर दिया बामन के लिए। तब साधु बालक से कहा कि “हे स्वामी अब आप  तीन पग जहाँ चाहे वहां से नाप लीजिये”। तब साधु बालक आसान से उठ खड़े हुए और मुस्कराये। 
 
भगवान वामन जी ने अपना बिक्रम रूप धारण किया  और  भगवन ने  अपने  पग से पूरी धरती नाप ली और दूसरे पग से स्वर्ग भी नाप लिया लेकिन तीसरे पग के लिए अब कोई  जगह ही नहीं बची थी। 
 
तब साधु  ने कहा कि मेरे लिए तीसरा पग के लिए जगह बताओ राजा बलि ने हाथ जोड़ कर बैठते हुए कहा कि “प्रभु अपना तीसरा पग मेरे सर पर रखिये ” और कुछ अब मेरे पास नहीं है सिवाय इस शरीर के साधु बालक ने अपना पैर राजा बलि के  सर पर रखा तो बलि अपने शरीर सहित पृथ्वी के नीचे के लोक रसातल को चला गया। 
 
भगवन ने बलि की ऐसी श्रद्धा भक्ति  देखकर बलि से कहा “हे दैत्य में तुझसे बहुत प्रसन्न हूँ ,तुझ जैसा दानवीर आज तक पैदा ही नहीं हुआ है ,तुम जो चाहो वो वर मुझसे मांग सकते हो “
 
राजा बलि  ने कहा कि आपके दर्शन मात्र से  मेरी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो गयीं हैं। प्रभु यदि मुझे यदि देना ही चाहते हैं तो बस अपनी भक्ती दीजिये और दूसरा वर में यह मांगता हूँ की आप मुझे छोड़कर कभी न जाएँ। 
 
तब भगवन ने प्रसन्न होते हुए कहा कि बलि “तथास्तु ” उसके भगवन बोले हे दैत्य ! तू  सदा दानियों में अग्रगण्य रहेगा तथा शास्त्रों में पूजन में भी दानी के रूप में तुझे पूजा जाएगा और अगले कल्प का इंद्र भी तू ही होगा। 
 
और तेरी भक्ति के कारन में तुझे छोड़कर कभी नहीं जाऊंगा तेरे दरवाजे पर ही रहूँगा इस साधु के बेष में। और यही कारण है कि जब भी कोई साधु पूजन करते समय धागा बांधता है तो  “दानवेन्द्रो राजा महाबली”का नाम उच्चारण करता है। अर्थार्त दान वीर में महाबली के सामान हो। 
 
कही कही ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि जब प्रभु दानवीर राजा के यहाँ ही ठहर गए तो स्वर्ग के देवता आदि सब बड़े चिंतित हो गए कि अब हम लोगों का क्या होगा ?यह इंद्र ने क्या करवा दिया ? तब सभी देवता ,ऋषि ,मुनि आदि सब ब्रह्मा जी के साथ माँ लक्ष्मी के पास गए और बोले कि आप ही हैं जो प्रभु को वापिस यहाँ ला सकती हैं। 
 
तब देवताओं के बहुत विनय प्राथना करने पर माँ लक्ष्मी रसातल गयीं और महाबली से प्रभू को माँगा तो बलि ने पहले तो स्वीकारा ही नहीं लेकिन बाद में उनकी इस बात से कि आप प्रत्येक साल की इस पूर्णिमा को मेरे घर पर आप दोनों साथ अवश्य आया करें। 
 
आप मेरा आथित्य स्वीकारा करें और आप मुझ दास का यह आग्रह  एक भाई के रुप में  ही स्वीकार कर लें। तब लक्ष्मी जी ने वचन देते हुए अपना आभूषण हाथ में पहना दिया। 
 
जिस दिन लक्ष्मी जी ने राजा बलि को अपना भाई बनाया था उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा की तिथि थी।  तभी से हर श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन बहन अपने भाई को राखी बाँधती है। तब से ही यह रक्षा बन्धन का पर्व भी प्रारम्भ हुआ ,ऐसा माना जाता है । ऐसी बहुत सी कथाएँ प्रचलित हैं जहाँ से रक्षा बंधन प्रथा की उत्पत्ति का व्याख्या मिलती है। 
 

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है ? Why Raksha Bandhan is Celebrated in Hindi

आखिर रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है इसका अच्छा उल्लेख महाभारत के श्री कृष्ण और द्रौपदी की कहानी में भी मिलता है- 
 
एक बार जब दुष्ट शिशुपाल ने श्री कृष्ण भगवन की  भरी सभा में अपमान की सभी हदें पार कर दीं  तब भगवन ने  सुदर्शन चक्र छोड़कर उस दुष्ट का अंत कर दिया। चक्र छोड़ते समय कृष्ण जी के ऊँगली छोटा सा खरोच होने से खून निकल  आया था तब तुरंत ही द्रोपदी जी ने एक बहिन का कर्तव्य निभाते हुए अपने साड़ी से थोड़ा सा भाग चिर कर प्रभु जी के ऊँगली में बांध दिया था। 
 
तब भगवन श्री कृष्ण ने भी उस भरी सभा में कहा कि ऐसे समय में भगिनी द्रोपदी ने अपना कर्तव्य निभाया है। में कृष्ण भी वचन देता हूँ कि द्रोपदी की भाई का कर्तव्य होते हुए में उसकी सदैव रक्षा के लिए तैयार रहूँगा। वह जब भी मुझे पुकारेगी तब तब में उसकी रक्षा के लिए सदैव खड़ा ही रहूँगा। 
 
इसके कुछ दिन पश्चात् ,एक दिन पांचों पांडव जुए में अपनी द्रोपदी को हार जाते हैं तब दुष्ट दुशासन द्रोपदी का भरी सभा में  चीर हरण करने का निंदनीय घोर महापाप करता है। 
 
जब द्रोपदी जी ने देखा कि इस भरी सभा में कोई उसकी लाज नहीं बचा सकता तब उन्होंने  श्री  कृष्ण को पुकारा। श्री कृष्ण ने तुरंत ही वस्त्रों के रूप में प्रकट हो गए, जिस पर  दुष्ट दुशासन थक कर हार गया वस्त्र खींचते खींचते जबकि उस दुष्ट  में पूरा एक हजार हाथियों का बल था। 
 
पूरी सभा आश्चर्य में पड़ गयी कि  “नारी है या साड़ी है या नारी बिच साड़ी है या साड़ी की ही नारी है”  वस्त्रो का पर्वत सा बन गया और इस तरह द्रोपदी बहिन की लाज बचाई भगवन श्री कृष्ण ने। उस समय से लेकर अब तक बहन भाई को राखी बाँध रही है और भाई भी उनको उनकी रक्षा का वचन देते हैं। 
 

रक्षाबंधन किस Date या तारीख को है? रक्षाबंधन 2020 में कब है?

जैसी ही वर्षा ऋतू का आरंभ होता है , सबके मन में बस एक ही सवाल आता है कि इस बार  रक्षा बंधन कब है? यूँ तो तिथि के अनुसार हर साल रक्षा बंधन श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है जो आम तौर पर अगस्त के महीने में ही पड़ता है। 
 
इस साल भी  रक्षा बंधन 2020 में 3 अगस्त सोमवार के दिन पड़ रहा है। अर्थात 3 अगस्त सोमवार को ही यह प्यारा पवित्र त्यौहार मनाया जायेगा। 
 
यह जानना भी जरुरी है कि रक्षाबंधन बांधने का सही समय या  सही मुहूर्त क्या है ? अर्थात  राखी बांधने का शुभ समय क्या है ?इस साल रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 09:28 से लेकर शाम के 09:14 बजे तक रहेगा, इस दौरान कभी भी बहन अपने भाई को राखी बाँध सकती है। 
 
अच्छा क्या आप सभी जानते  हैं कि 15 अगस्त को रक्षाबंधन अब तक कितनी बार मनाया जा चूका है मतलब 15 अगस्त और रक्षाबधन कितनी बार अब तक साथ साथ मनाये गये हैं ?
 
1947 से लेकर अब तक  रक्षा बंधन की तिथि सन 1962, 1981 और 2000 के वर्ष में स्वतंत्रता दिवस के साथ मनाया जा चूका है एवं 2019 में भी रक्षाबंधन 15 अगस्त को ही मनाया गया था। 1947 से लकेर अब तक रक्षाबंधन 15 अगस्त के साथ 4 बार मनाया चूका है। 
 

रक्षा बंधन के दिन क्या क्या किया जाता है
तथा इसे कैसे मनाते हैं ?

रक्षा बधंन भाई बहिन के पवित्र रिश्ते का प्रसिद्ध त्यौहार है , रक्षाबंधन का मतलब होता है रक्षा का बंधन। रक्षा मतलब सुरक्षा , केयर ,बचाव और बंधन का मतलब है जुड़ना  , मजबूत सच्चा रिश्ता होना । 
 
तो इस दिन भाई अपनी बहिन की सुरक्षा का , उसके केयर का वचन देता है कि उम्र भर अपनी बहिन की सुरक्षा पर किसी प्रकार की  आंच नहीं आने देगा। इसलिए इस दिन राखी मतलब रक्षासूत्र का ही मुख्य महत्व होता है। 
 
रक्षाबंधन त्यौहार के दिन घर के सभी सदस्य सुबह जल्दी उठ जाते हैं और रक्षा बंधन की तैयारियों शुरू करने लगते हैं। प्रत्येक परिवार में खूब चहल पहल रहती है ,सभी में ख़ुशी और हर्षोल्लास का माहौल रहता है। तरह तरह के पकवान व मिठाई बनायीं जाती हैं। कुछ बहिने तो स्वयं अपने हाथ से भाई के लिए मिष्ठान बनाती हैं। कुछ बाजार से मँगवाती हैं। 
 
चलिए अब जानते हैं कि कैसे इस त्यौहार पर थाली सजाते हैं  या उसका क्या सही तरीका है ? इस दिन प्रातः स्नान कर लड़कियां और महिलाएं नए वस्त्र धारण कर पूजा की थाली सजाती हैं, थाली में राखी के साथ, हल्दी, कुमकुम, चावल के दाने, दीपक, मिठाई, गंगाजल रखती है। 
 
थाली आप समान्य ले सकती हैं या फिर बाज़ार में उपलब्ध अच्छे डिज़ाइन की रंगबिंरगी थाली भी पूजा में ले सकती हैं। रक्षाबंधन पावन पर्व धार्मिक क्रिया की शुरुआत  थाली में दीप जलाकर किया जाता है। 
 
उसके बाद बहने राखी की सजी हुई थाली लेकर सबसे पहले भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं , चावल छिड़कती हैं , सर पर फूल बरसाती हैं। उसके बाद भाई की आरती  उतारती हैं और भाई की लम्बी उम्र की कामना करती हैं   , उसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर सुनदर सूंदर रक्षासूत्र बांधती हैं जो या तो बहिन ने स्वयं बनाये होते हैं या फिर बाजार से खरीद कर लाती हैं। 
 
राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई आदि खिलाकर मुँह मीठा कराती हैं। उसके पश्चात् भाई बहिन को कुछ उपहार देते हुए पैर छूकर उसकी रक्षा करने का वचन देता है। लेकिन कहीं  कहीं छोटी भीं बड़े भाई को राखी बांधकर पैर छूती हैं और भाई का आशीर्वाद लेती हैं। 
 
इस दिन की खास बात यह भी होती है कि जब तक बहिन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र नहीं बांध देती है तब तक  वह उपवास रखती है। 
 
रक्षाबंधन के लगभग 10  दिन पहले से ही बाजारों में रंग बिरंगी रक्षासूत्र बेचे जाने लगते हैं।रक्षाबंधन के दिन बाज़ार में कई सारे उपहार भी बिकते हैं। अच्छे अच्छे  उपहार और नए कपडे खरीदने के लिए बाज़ार में लोगों की सुबह से शाम तक खूब भीड़ रहती  है , इस दिन बजार में मिठाईयों की दुकान पर भी काफी भीड़ देखने को मिलती है क्योंकि बहुत सी  बहनें अपने भाइयों के लिए भिन्न भिन्न प्रकार की मिठाइयाँ खरीदती है। 
 
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल भी हो सकता है कि यह त्योहर कितने दिन तक मनाया जाता है ? रक्षा बंधन का यह त्यौहार सावन पूर्णिमा से लेकर भादों की अष्टमी मतलब कृष्ण जन्मास्टमी तक मनाया  जाता है मतलब रक्षा बंधन से लेकर 8 दिन तक बहिने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। 
 
यदि ऐसे में कोई भी भाई  दूर कहीं है घर से तो वह इन दिनों के मध्य  में भी आकर बहिन से राखी बंधवा सकता है और इस तरह वो राखी का त्यौहार  मना सकते हैं। 
 

रक्षा बंधन पर बहन के लिए कविता

बड़ा ही अनोखा है यह रक्षा का बंधन 
ओ बहिना तू है मेरी घर का कुंदन। 
पुष्प दीप सजाकर थाली में 
आई बहिना भाई का करने पूजन 
 सदा लम्बी हो उम्र तेरी भैया मेरे 
हर रोज यही  दुआ करूँ रब से 
मिले तुझे वो जो तेरा मन चाहे 
तेरी यश कीर्ति संसार में छा  जाये 
जहां की सारी खुशियां मिले तुझे बहिना 
कभी भूले कोई दुःख न  आए तेरे अंगना 
यह भाई अपना दायित्व कभी भूले न 
यही याद दिलाने आता है रक्षा बंधन 
लाख भी आये परेशानी जीवन में 
पर जीवन भर संग अपना साथ छूटे न 
 

रक्षा बंधन के लिए शायरी

“रिश्ता है यह सबसे सूंदर और सादा
बहन बांधे है राखी, भाई करे है वादा
बहन और भाई का प्यार है पवित्र सच्चा
इसलिए माना जाता है यह रिश्ता सबसे अच्छा.”
यह रक्षाबंधन त्यौहार भाई और बहन के बीच प्यार और मधुर संबंध को दर्शाता है। दोस्तों इस साल आप भी अपने बहन और भाई को राखी के मौके पर खूब सारा प्यार दें और उसकी केयर करें , सदा उसे बुरे मार्ग और बुराइयों से बचाएं।  यह भाई की जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी छोटी बहिन  का पिता के समान पग पग पर सपोर्ट करे उसका ख्याल रखे। 
 
दोस्तों इस बार कोरोना महामारी के चलते यह त्यौहार शायद ही उतने हर्षोल्लास और ख़ुशी के साथ  मना पाएंगे जितना की हर वर्ष मनाते हैं। मेरे प्यारे दोस्तों हम सभी मिलकर  ईस्वर से प्रार्थना करें कि इस महामारी से जल्दी ही समस्त संसार को मुक्ति मिले। और लोग पहले की तरह हंस खेल पाएं और साथ में खुशियां मना पाएं। 
 
दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आपको ये लेख “रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है पुराणों के अनुसार” पसंद आया होगा। दोस्तों यदि आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों, भाई और बहनों के साथ जरुर शेयर करें।दोस्तों अपना ख्याल रखें साफ सफाई और सोशल डिस्टैन्सिंग का सावधानी पूर्वक पालन करें , जहां भी रहें सुरक्षित रहें। आप सभी को भी आप और आपके परिवार को रक्षाबंधन की ढेर सारी शुभकामनायें। 
 

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